विभाग के बारे में
अधिकरण की स्थापना 03-10-1980 को की गई थी। वाणिज्य कर अधिकरण में अध्यक्ष विभाग का प्रमुख यानी विभागाध्यक्ष होता है। विभागाध्यक्ष उच्चतर न्यायिक सेवा का अधिकारी होता है जो प्रतिनियुक्ति पर इस अधिकरण में तैनात किये जाते हैं। वर्तमान में अध्यक्ष, वाणिज्य कर अधिकरण, उत्तराखंड, देहरादून के पद पर श्री मलिक मज़हर सुलतान, ए.जे.एस. तैनात हैं। प्रदेश में दो पीठ कार्यालय देहरादून एवं हल्द्वानी कार्यरत हैं, जिनका न्यायिक एवं प्रशासनिक नियंत्रण विभागाध्यक्ष के अधीन रहता है। वाणिज्य कर अधिकरण में उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2005 से संबंधित अपीलों की सुनवाई/निस्तारण किया जाता है।
‘अधिनियम’ का तात्पर्य उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2005 से है।
अधिकरण : अधिकरण से तात्पर्य ‘उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2005’ की धारा-54 में गठित से है।
सरकार : सरकार से तात्पर्य उत्तराखंड राज्य सरकार से है।
अध्यक्ष : अध्यक्ष से तात्पर्य उस अधिकारी से है जो माननीय उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है और जिसके पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण में
अधिकरण के मुख्यालय सहित समस्त सदस्य तथा पीठ कार्यालय कार्य करते हैं।
सदस्य:सदस्य का तात्पर्य अधिकरण के सदस्य से है और इसमें अध्यक्ष भी शामिल है।
अपील:अपील का तात्पर्य ऐसी अपील से है जो व्यापार कर अधिनियम की धारा 35, 10, 10(बी) और 4-ए(3) तथा संशोधित नवीन ‘उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर अधिनियम 2005’ की धारा 51, 52, 57 और 76 के अंतर्गत विभिन्न अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध राहत/निवारण के लिए न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
विविध:विविध प्रार्थना पत्र से तात्पर्य उन प्रार्थना पत्रों से है जो अधिकरण के निर्णय में पाई गई त्रुटि के निवारण अथवा अन्य राहत हेतु प्रस्तुत किए जाएँगे।
वाणिज्य कर अधिकरण का मुख्य कार्य व्यापार / वाणिज्य कर से संबंधित द्वितीय अपीलों के निस्तारण का है जिसका वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है —
- एक सदस्यीय पीठ से तात्पर्य ‘उत्तराखंड मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2005’ की धारा 53 की उपधारा 10(ए)(ii) के अंतर्गत गठित अधिकरण की एकल पीठ से है, जिसके अंतर्गत अध्यक्ष की न्यायपीठ भी है।
- खण्ड पीठ (दो सदस्यीय) का तात्पर्य ऐसी न्याय पीठ से है जिसमें कम से कम एक सदस्य उच्च न्यायिक सेवा का और एक अन्य सदस्य हो।
- पूर्ण न्याय पीठ का तात्पर्य तीन सदस्यों की ऐसी न्याय पीठ से है जिसमें कम से कम एक ए.जे.एस. सदस्य या अध्यक्ष और दो अन्य सदस्य हों।
बृहत पीठ का मतलब है ट्रिब्यूनल के तीन से ज़्यादा सदस्यों की बेंच, जिसमें अध्यक्ष समेत ए.जे.एस. के कम से कम आधे सदस्य और अधिकरण के बाकी आधे सदस्य शामिल हों। इसे अध्यक्ष समय-समय पर एक्ट के तहत सामान्य या विशेष आदेश से बनाते हैं ताकि ऐसी अपीलों का निपटारा किया जा सके जिनमें कानून का कोई ज़रूरी सवाल शामिल हो।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार का मतलब अधिकरण का वह अधिकारी है जो समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा सौंपे गए असिस्टेंट रजिस्ट्रार के काम करता है।
वाणिज्य कर अधिकरण में व्यापारियों / कमिश्र व्यापार कर द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली अपीलें जिसमें निहित विवादित धनराशि रुपये 2,00,000/- तक है, की सुनवाई एक सदस्यीय पीठ द्वारा तथा जिनमें रुपये 2,00,000/- से अधिक विवादित धनराशि है और धारा – 52 व धारा – 43 की उपधारा 43(8) के अधीन प्रस्तुत अपीलों की सुनवाई दो सदस्यीय पीठ द्वारा और धारा – 57 व 76 की उपधारा 13 या 16 से संबंधित अपीलों की सुनवाई पूर्ण पीठ द्वारा की जाती है।
धारा 54. अपील अधिकरण का गठन
अधिनियम के द्वारा या अधीन अधिकरण को सौंपे गए कार्यों का निष्पादन करने के लिए सरकार एक अधिकरण का गठन करेगी जिसमें एक अध्यक्ष और ऐसे सदस्य होंगे जैसा कि वह ठीक समझे।
अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति निम्नलिखित में से की जाएगी—
- उत्तराखंड उच्चतर न्यायिक सेवा के ऐसे अधिकारी जो एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज से निम्न पद न हो या न रहे हों; और
- उत्तराखंड वाणिज्य कर सेवा (राज्य कर सेवा) के ऐसे अधिकारी जो एडिशनल कमिश्नर से निम्न पद न हो या न रहे हों।